मुजफ्फरपुर। थियोसोफिकल लाज नया टोला मुजफ्फरपुर में बज्जिका विकास मंच मुजफ्फरपुर के ज्ञानवृद्ध एव वयोवृद्ध बज्जिका साहित्य मनीषियों के साथ एक परिचर्चा-"बज्जिका भाषा चुनौतियां और समाधान " विषय पर हुई ।परिचर्चा पर विषय प्रवेश करते हुए बज्जिका विकास मंच मुजफ्फरपुर के उपाध्यक्ष उदय नारायण सिंह ने कहा कि बज्जिका कितना प्राचीन है यह इस बात से ज्ञात होता है कि वाल्मीकीयरामायण,शतपथ ब्राह्मण,वराह पुराण,नारदीय पुराण और मार्कण्डेय पुराण में यह क्षेत्र विशाला नगरी के नाम से अभिहित है ।इस विशाला नगरी की स्थापना का श्रेय इक्ष्वाकु पुत्र विशाल को दिया गया है ।जिन्होंने गंगा से उत्तर सदानीरा से पूरब एवं कौशकी से पश्चिम एक बहुत ही खूबसूरत नगर का निर्माण किया और उसका नाम- "विशाला नगरी" रखा ।वही विशाला नगरी कालक्रम से वृज्जीसंघ के नाम से अभिहित है और आज इसे लोग वैशाली के नाम से जानते हैं।कुछ विद्वानों की मान्यता है कि वृज्जी शब्द व्रजी शब्द से बना है जिसका अर्थ समूह/झूंठ होता।व्रजी लोग समूह में रहते थे और यही समूह ई सन से 600 वर्ष पूर्व आठ कुलों को जोड़ कर एक विस्तृत समूह/संघ बना जिसे वृज्जी संघ/वज्जी संघ कहा गया जो प्रजातंत्र की पहली जननी बना ।जर्ज र्ग्रियर्सन ने इसकी बोली को पश्चिमी मैथिली /पूरबी भोजपुरी कहा था । सबसे पहले महापंडित,भाषा विद् राहुलसांकृत्यान ने 1936 में अपने -"पुरातत्व निवंधावली "मे इस क्षेत्र की बोली/भाषा को बज्जिका नाम से अभिहित किया ।तबसे ही इस क्षेत्र की बोली बज्जिका कही जाने लगी।इस क्षेत्र के लिए यह चिंता की बात है कि आज भी यह बोली सरकारी उदासीनता और लोगों की जागरूकता के अभाव में हंसिये पर है ।जबतक बज्जिका को संविधान की अष्टम सूची में शामिल में शामिल नहीं किया जाएगा तबतक हम संघर्ष की ज्योति जलाए रहेंगे । बज्जिका भाषा के उन्नयन हेतु आवश्यक है कि सीताकांत महापात्रा की अनुशंसा के आलोक में इसे संविधान की अष्टम सूची में शामिल किया जाए ।बिहार सरकार त्वरित बज्जिका अकादमी का गठन करें ।बज्जिका को रोजी-रोटी से जोड़ा जाए ।कोई भी भाषा समुन्नत तभी बनती हैं जब उसे रोजी-रोटी से जोड़ा जाता है।
जनगणना में बज्जिका का कोड निर्धारित हो ।यह कितना बड़ा दुर्भाग्य है कि जो बोली ढाई से तीन करोड़ की जनता की बोली है ,वह आज उपेक्षित है ।
हमारी सरकार से मांग है कि बिहार सरकार और भारत सरकार दोनों सरकारें इस भाषा को रोजी-रोटी से जोड़े । अब यह बोली नहीं भाषा बन गई । इसका एक विपुल साहित्य भंडार है । आज के दौर में बज्जिका भाषा में हर विधा की एक -दो नहीं हजारों पुस्तकें उपलब्ध हैं ।डा प्रो हरेन्द्र प्रसाद सिंह विल्पव और डॉ अवधेश्वर अरुण की क्रमशः कच-देवयानी,बज्जिका रामायण महाकाव्य है तो डॉ शारदा चरण के बज्जिका भाषा में लिखित- "बज्जिका व्याकरण बोध" और उदय नारायण सिंह का बज्जिका भाषा में लिखित-"बज्जिका भासा आ साहित्य के इतिहास" इसकी समृद्धि के प्रतीक हैं। परिचर्चा में भाग लेते हुए डॉ हरि किशोर प्रसाद सिंह ने कहा कि बज्जिका के समाने सबसे बड़ी चुनौती है कि हमें कदम-कदम पर सरकार से लड़ना पड़ता है और सरकार कान में तेल डालकर सोयी हुई है ।हमें इस सरकार को जगाना होगा ।साथ ही बज्जिका भाषा को पाठ्यक्रम में शामिल करना होगा ।प्रेम कुमार वर्मा ने कहा कि बज्जिका के समाने सबसे बड़ी चुनौती है बज्जिका के साहित्यकारों की किताबें धन के अभाव में प्रकाशित नहीं हो पाती है ।हम बिहार सरकार और भारत सरकार दोनों सरकारों से मांग करते हैं बिहार में बज्जिका अकादमी और केन्द्र में बज्जिका विद्यापीठ का त्वरित गठन हो और उसके माध्यम से बज्जिका के साहित्यकारों को बज्जिका पुस्तक के प्रकाशन हेतु बज्जिका साहित्यकारों को प्रोत्साहन एवं पुरस्कार राशि दी जाए ।गणेश प्रसाद सिंह ने कहा कि बज्जिका की चुनौती यह है कि हमरी सरकार बज्जिका के प्रति उदासीन हैं ।जब तक बज्जिकांचल की जनता सरकारी चक्का जाम नहीं करेगी तबतक इस बहरी सरकार को जगाना मुश्किल है ।अभी तक बज्जिका भाषा की पढ़ाई भीम राव अंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय मुजफ्फरपुर मुजफ्फरपुर में ऐक्षिक विषय के रूप में नहीं किया जाना सरकार एंव कुलपति की इस भाषा के प्रति उदासीनता का परिचय है ।हमारी कुलपति से मांग है कि भीम राव अंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय मुजफ्फरपुर मुजफ्फरपुर के स्नातकोत्तर हिन्दी विभाग में ऐक्षिक विषय के बज्जिका भाषा को अविलंब शामिल किया । रमेश प्रसाद श्रीवास्तव ने कहा कि बज्जिका के सामने सबसे बड़ी चुनौती है कि हमे कदम-कदम पर सरकार से लड़ना पड़ता है और सरकार नकारा है ।बज्जिका अकादमी गठन की बात आज दो दशकों से चल रही है लेकिन दुखद है बिहार सरकार ने यह काम आजतक नहीं किया ।इसके लिए हमें अपने-अपने क्षेत्र के विधायकों एवं सांसदो पर दबाव बनाना होगा ।मधुमंगल ठाकुर ने कहा कि बज्जिका की सबसे बड़ी चुनौती है कि हमारे राजनेताओं के मन में बज्जिका के प्रति कोई अनुराग नहीं है ।वे जब वोट मांगने आते हैं तो हम उनसे वचन ले कि जब वे जीतकर जाएंगे तो बिहार विधान सभा एवं संसद में अपनी-अपनी बातें बज्जिका भाषा में रखेंगे ।तभी उन्हें वोट करें वरना वोट का बहिष्कार करें।
पुनश्च- प्रो पवन कुमार मिश्र ने कहा कि बज्जिका आयोग की स्थापना बिहार सरकार त्वरित करे ताकि बज्जिका का समुन्नत विकास हो सके ।आकाशवाणी से बज्जिका में समाचार का सप्ताह में कम से कम दो दिन वाचन हो ।राजेश प्रसाद शाही ने कहा बज्जिकांचल के साहित्यकार/राजनेता किसी भी सभा में अपनी बात बज्जिका में रखें ताकि बज्जिका भाषा का विकास हो ।आपसी पारिवारिक बातें भी बज्जिका में हो तभी बज्जिका समृद्ध होगी ।अमिय भूषण ने कहा कि बज्जिकांचल की सभाओं में सभी वक्ता अपनी बात बज्जिका भाषा में ही रखें ।गर कोई हिंदी में बोलते हैं तौभी बीच-बीच में बज्जिका भाषा का प्रयोग हो ताकि बज्जिका भाषा समुन्नत हो ।सोशल मीडिया पर बज्जिकांचल के लोग अपनी-अपनी बातें बज्जिका भाषा में रखें ।इससे बज्जिका भाषा का प्रचार -प्रसार अधिक होगा ।दिलीप कुमार ने कहा बज्जिका की पढाई प्रथम वर्ग से सरकार सुनिश्चित करे तभी बज्जिका समृद्ध होगी ।डॉ रवींद्र कुमार ने कहा कि बज्जिका तभी समृद्ध होगी जब बज्जिकांचल के सभी लोग अपनी-अपनी बातें बज्जिका भाषा में करेंगे ।राजेश कुमार चौधरी ने कहा कि बज्जिका भाषा को रोजगारपरक बनाया जाए ।बज्जिकांचल के समाचार पत्रों में एक कांलम निश्चित रूप से बज्जिका में आए ।इससे बज्जिका भाषा का विकास निश्चित संभव है ।देवेन्द्र कुमार शर्मा ने कहा बज्जिका का ज्यादा नुकसान शहरीकरण के कारण हुआ है ।गांव में आज भी बज्जिका जिंदा है ।बज्जिकांचल के पढे-लिखे एवं विद्वान लोग हर जगह अपनी बात बज्जिका भाषा में करें तभी बज्जिकांचल एवं बज्जिका भाषा का विकास संभव है ।रमेश प्रसाद श्रीवास्तव के द्वारा आत्मीय धन्यवाद ज्ञापन के पश्चात अध्यक्ष के निदेशानुसार परिचर्चा का समापन हुआ ।



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