ब्रह्मर्षि सम्मेलन में सामाजिक एकता, शिक्षा और विरासत संरक्षण पर जोर

 


मुजफ्फरपुर। जिले के सकरा प्रखंड स्थित विष्णुपुर बघनगरी गांव के प्रसिद्ध परशुराम धाम बघनगरी में अखिल भारतीय भगवान परशुराम परिषद के तत्वावधान में भव्य ब्रह्मर्षि सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस सम्मेलन में विभिन्न जिलों से आए समाज के बुद्धिजीवियों, शिक्षाविदों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और युवाओं ने भाग लेकर समाज की एकता, विकास और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण पर गंभीर चर्चा की। कार्यक्रम का उद्देश्य सवर्ण समाज के ऐतिहासिक योगदान को रेखांकित करते हुए भविष्य की दिशा तय करना रहा।

कार्यक्रम की शुरुआत वैदिक मंत्रोच्चार और भगवान परशुराम के चित्र पर माल्यार्पण के साथ हुई। 

सम्मेलन को संबोधित करते हुए धर्मवीर शुक्ला ने कहा कि समाज की प्रगति के लिए सभी वर्गों को मिलकर कार्य करना होगा। उन्होंने सभी आगंतुकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस तरह के सम्मेलन समाज को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।


वहीं उदय शंकर प्रसाद सिंह, डॉ. मोनालिसा, रघुनंदन प्रसाद सिंह उर्फ अमर बाबू, कादंबिनी ठाकुर तथा रणवीर सेवा प्रमुख रंजीत शर्मा ने भी अपने विचार व्यक्त किए। सभी वक्ताओं ने समाज में शिक्षा, संगठन और जागरूकता की आवश्यकता पर बल दिया। वक्ताओं का कहना था कि समाज के युवाओं को आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ अपनी संस्कृति और परंपराओं से भी जुड़े रहना चाहिए, तभी समाज का समग्र विकास संभव है।

कार्यक्रम के संयोजक डॉ. अनमोल कुमार मिश्रा ने अपने संबोधन में कहा कि ब्रह्मर्षि सम्मेलन का उद्देश्य समाज को एक मंच पर लाकर उनके मुद्दों और समस्याओं पर चर्चा करना है। उन्होंने कहा कि समाज की ऐतिहासिक धरोहरों को संरक्षित करना और नई पीढ़ी को उसके महत्व से अवगत कराना हम सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने यह भी बताया कि संगठन के माध्यम से शिक्षा, सामाजिक सहयोग और युवाओं के मार्गदर्शन के लिए आने वाले समय में कई योजनाएं चलाई जाएंगी। वही डॉ. अनमोल कुमार मिश्रा ने जानकारी देते हुए बताया कि आगामी 26 फरवरी को परशुराम धाम बघनगरी में सामूहिक रूप से उपनयन संस्कार (जनेऊ संस्कार) का आयोजन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस धार्मिक आयोजन में विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में बरुआ (बालक) भाग लेंगे। इसके लिए तैयारियां शुरू कर दी गई हैं और समाज के लोगों से अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर कार्यक्रम को सफल बनाने की अपील की गई है। आयोजकों के अनुसार यह सामूहिक उपनयन संस्कार सामाजिक परंपराओं को सशक्त करने और नई पीढ़ी को संस्कारों से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल होगी।

सम्मेलन में प्रमुख वक्ता के रूप में डॉक्टर विजयेश पराशर, सुखदेव ओझा और पूर्व मुखिया शिवचंद्र मिश्रा ने भी अपने विचार रखे। उन्होंने समाज के लोगों से आपसी मतभेद भुलाकर एकजुट होने का आह्वान किया। वक्ताओं ने कहा कि जब समाज संगठित होगा, तभी सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक रूप से मजबूती आएगी। साथ ही उन्होंने समाज के हितों की रक्षा के लिए जागरूकता और सक्रिय भागीदारी पर जोर दिया।

इस अवसर पर समाज के विकास, युवाओं के भविष्य, शिक्षा के विस्तार और सामाजिक समरसता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। सम्मेलन में उपस्थित लोगों ने सुझाव दिया कि समाज के प्रतिभाशाली छात्रों को प्रोत्साहित किया जाए और उन्हें आगे बढ़ने के लिए हर संभव सहयोग प्रदान किया जाए। इसके अलावा सामाजिक संस्थाओं के माध्यम से लोगों के बीच आपसी सहयोग और संवाद को बढ़ावा देने की बात भी कही गई।

कार्यक्रम में विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए, जिनमें रविंद्र कुमार मिश्रा, रमेश चंद्र मिश्रा, बबलू मिश्रा, पारस मिश्रा, अखिलेश कुमार मिंटू, डॉक्टर रोशन मिश्रा, नीलमणि मिश्रा, विकास ठाकुर, मुक्तेश्वर प्रसाद सिंह, कामेश्वर मिश्र घुमक्कड़, गुंजन मिश्रा, सिमरन दुबे, मोनू सिंह, शांतनु सत्यम तिवारी, नवीन कुमार मिश्रा, सुनील मिश्रा और संजीव मिश्रा समेत कई गणमान्य लोग उपस्थित थे। सम्मेलन में लोगों की उत्साहपूर्ण भागीदारी ने कार्यक्रम को सफल और सार्थक बनाया।

कार्यक्रम का सफल संचालन चंद्रशेखर प्रसाद सिंह ने किया, जबकि सम्मेलन की अध्यक्षता अवधेश मिश्रा उर्फ संत जी ने की।

 सम्मेलन के अंत में समाज की एकता, शिक्षा के प्रसार और सामूहिक विकास के लिए मिलकर कार्य करने का संकल्प लिया गया। आयोजकों ने उम्मीद जताई कि इस तरह के आयोजन भविष्य में भी समाज में सकारात्मक बदलाव और जागरूकता लाने का माध्यम बनेंगे। कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।



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