विकास की नई उड़ान भरता मुजफ्फरपुर

जिले को मिली बड़ी सौगात एवं राष्ट्रीय पहचान: नीति आयोग  से 9 करोड़ से अधिक की योजनाओं को मिली मंजूरी,


गांव-गांव तक स्वास्थ्य सेवाएं होंगी सुगम एवं सुदृढ़: 24×7 सिजेरियन प्रसव की व्यवस्था, HWC केंद्र होंगे सुदृढ़


आधुनिक वेयरहाउस से किसान होंगे खुशहाल, कृषि अर्थव्यवस्था को मिलेगी मजबूती 


मुजफ्फरपुर। नीति आयोग द्वारा आकांक्षी जिला कार्यक्रम के अंतर्गत उत्कृष्ट प्रदर्शन के आधार पर मुजफ्फरपुर जिला को 10 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि मिलना जिले के लिए गौरव और उपलब्धि का ऐतिहासिक क्षण है। जिलाधिकारी सुब्रत कुमार सेन के कुशल नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में चलाये गये विशेष अभियान, नियमित निरीक्षण और जमीनी स्तर पर सतत निगरानी एवं अधिकारियों के साथ की गई सतत प्रभावी समीक्षा ने संपूर्णता अभियान को  गति दी । फलस्वरूप नीति  आयोग द्वारा जिले के संपूर्णता अभियान के हर सूचकांक पर किये गये     शानदार प्रदर्शन एवं उल्लेखनीय उपलब्धि को  स्वीकार करते हुए जिले को पुरस्कारस्वरूप राशि और प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया जिससे जिले को राष्ट्रीय पटल पर पहचान मिली। अब जिला पदाधिकारी द्वारा तैयार कार्य योजना एवं अनुशंसा के आलोक में नीति आयोग द्वारा 9 करोड़ 56 लाख रुपये की लागत से 8 महत्वपूर्ण विकास योजनाओं को मंजूरी  दी गई है। 

इन योजनाओं के माध्यम से जिले में शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि क्षेत्र में आधारभूत संरचनाओं को सुदृढ़ कर विकास की गति तेज किया जाएगा जिससे गांवों की तस्वीर बदलेगी।


नवोदय विद्यालय खरौनाडीह:  3.8 करोड़  की लागत से बालिका छात्रावास, डिजिटल लाइब्रेरी, मेडिकल फैसिलिटी की बहाल होगी सुविधा 

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कुढ़नी प्रखंड अंतर्गत स्थित जवाहर नवोदय विद्यालय खरौनाडीह में 3 करोड़ 8 लाख 3 हजार 34 रुपये की लागत से विभिन्न विकास कार्य किए जाएंगे। यहां बालिका छात्रावास का निर्माण, डिजिटल लाइब्रेरी की स्थापना, मेडिकल कक्ष का निर्माण तथा वॉटर प्यूरीफायर की व्यवस्था की जाएगी। 

पीएम श्री योजना अंतर्गत पीएम श्री जवाहर नवोदय विद्यालय खरौनाडीह में 1 करोड़ 20 लाख 49 हजार 374 रुपये की लागत से बालिका छात्रावास का निर्माण किया जाएगा, ताकि बालिकाओं को सुरक्षित और सम्मानित आवासन की सुविधा तथा गुणवत्तापूर्ण शिक्षण व्यवस्था एवं बेहतर शैक्षणिक वातावरण का निर्माण कर शिक्षा में गुणात्मक सुधार लाया जा सके।  सूचना प्रौद्योगिकी और संचार क्रांति के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए 1 करोड़ 44 लाख 29 हजार 299 रुपये की लागत से डिजिटल लाइब्रेरी का निर्माण होगा, जिससे छात्रों को ई-लर्निंग और ऑनलाइन संसाधनों की सुविधा मिल सकेगी। इसके अतिरिक्त 28 लाख 29 हजार 381 रुपये की लागत से मेडिकल कक्ष का निर्माण किया जाएगा, ताकि बच्चों को प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाएं विद्यालय परिसर में ही उपलब्ध हो सकें।बच्चों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए 14 लाख 95 हजार रुपये की लागत से 13 आरओ प्यूरीफायर स्थापित किए जाएंगे।


7 केजीबी में 4.70 करोड़ की लागत से होगा कंप्यूटर कक्ष, पुस्तकालय एवं बहुद्देशीय हॉल की व्यवस्था 

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ग्रामीण क्षेत्र के कमजोर वर्ग की वंचित बच्चियां को नि:शुल्क आवासीय एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से जिलाधिकारी द्वारा कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय में 4 करोड़ 70 लाख की लागत से बहुद्देशीय  हॉल, पुस्तकालय सह कंप्यूटर कक्ष का निर्माण किया जाएगा। यह कार्य बोचहा,गायघाट ,कटरा, कुढ़नी , मरबन, मुरौल, मुसहरी एवं साहेबगंज में निर्माण किया जाएगा। इससे दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्र के कमजोर वर्ग की बच्चियों को नि:शुल्क आवासीय शिक्षा  मिल पायेगा।

  इन योजनाओं के क्रियान्वयन से न केवल शैक्षणिक और स्वास्थ्य संरचना मजबूत होगी, बल्कि जिले के सर्वांगीण विकास को नई दिशा मिलेगी। शिक्षा के क्षेत्र में आधुनिक संसाधनों की उपलब्धता से विद्यार्थियों में प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता विकसित होगी, वहीं स्वास्थ्य केंद्रों की सुदृढ़ता से ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को बेहतर चिकित्सा सुविधा प्राप्त होगी।


50 हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों में सुदृढ़ चिकित्सा व्यवस्था

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जिले के 50 हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों को आवश्यक दवाओं, जांच उपकरणों, प्रसव संबंधी सामग्री और जीवन रक्षक संसाधनों से सुसज्जित किया जाएगा। इन केंद्रों का उद्देश्य प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाना है, ताकि ग्रामीण जनता को अपने ही क्षेत्र में बेहतर इलाज मिल सके। हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों के माध्यम से मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, टीकाकरण, गैर-संचारी रोगों की जांच, परिवार नियोजन, पोषण परामर्श तथा नियमित स्वास्थ्य जांच जैसी सेवाएं सुलभ होंगी।

इन केंद्रों को सुदृढ़ करने से मरीजों को जिला मुख्यालय या बड़े अस्पतालों तक जाने की आवश्यकता कम होगी। इससे समय और धन दोनों की बचत होगी तथा प्राथमिक स्तर पर ही अधिकांश बीमारियों का उपचार संभव हो सकेगा।


7 CHC में 24×7 आपातकालीन प्रसव एवं सिजेरियन सुविधा

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ग्रामीण महिलाओं की सुरक्षा और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए सदर, पारु, मुरौल, मीनापुर, औराई, कुढ़नी एवं गायघाट के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में फर्स्ट रेफरल यूनिट (एफआरयू) के रूप में 24×7 प्रसूति सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इन केंद्रों में सिजेरियन डिलीवरी की सुविधा भी प्रारंभ की जाएगी।

इन अस्पतालों में अत्याधुनिक ऑपरेशन थिएटर, प्रसव कक्ष, जीवन रक्षक उपकरण, ब्लड स्टोरेज यूनिट तथा नवजात शिशुओं की देखभाल के लिए विशेष इकाई स्थापित की जाएगी। साथ ही स्त्री रोग विशेषज्ञ, शिशु रोग विशेषज्ञ एवं एनेस्थेटिस्ट की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी, ताकि जटिल परिस्थितियों में भी त्वरित और प्रभावी चिकित्सा सेवा दी जा सके।


गरीब एवं जरूरतमंद महिलाओं को सीधा लाभ

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FRU सुदूरवर्ती ग्रामीण क्षेत्रों की गरीब एवं जरूरतमंद महिलाओं को अक्सर प्रसव के समय कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। निजी अस्पतालों में सिजेरियन ऑपरेशन का खर्च वहन करना अधिकांश परिवारों के लिए कठिन होता है। इस नई व्यवस्था के तहत स्थानीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में ही सिजेरियन की सुविधा मिलने से उन्हें बाहरी खर्च से राहत मिलेगी।

यह पहल न केवल आर्थिक बोझ को कम करेगी, बल्कि समय पर चिकित्सा उपलब्ध होने से जटिलताओं की संभावना भी घटेगी। गर्भावस्था के दौरान जोखिम की स्थिति में अब महिलाओं को दूर-दराज के अस्पतालों में रेफर करने की आवश्यकता कम होगी।


मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में  होगी कमी 

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 FRU का मुख्य उद्देश्य संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देना तथा मातृ और शिशु मृत्यु दर में कमी लाना है। 24×7 सिजेरियन एवं प्रसूति सेवाओं के माध्यम से सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित किया जाएगा। कम वजन या समय से पूर्व जन्मे नवजात शिशुओं के लिए विशेष देखभाल की सुविधा उपलब्ध रहेगी, जिससे उनकी जीवित रहने की संभावना बढ़ेगी।

विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती से जटिल मामलों का तत्काल उपचार संभव होगा। इससे प्रसव के दौरान होने वाली आकस्मिक मौतों को रोका जा सकेगा और महिलाओं में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति विश्वास भी बढ़ेगा।


स्वास्थ्य सेवा में व्यापक सुधार की पहल

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जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि  HWC और FRU द्वारा जिले में स्वास्थ्य सेवा को त्वरित, बेहतर एवं सुगम  बनाने की प्लानिंग है ताकि गांव के गरीब एवं जरूरतमंद व्यक्तियों को इलाज के लिए बाहर नहीं जाना पड़े बल्कि स्थानीय स्तर पर ही गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा की सुविधा सहज रूप में सुलभ हो जाय। हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों को सशक्त बनाना और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को फर्स्ट रेफरल यूनिट के रूप में विकसित करना इसी दिशा में एक ठोस कदम है।


कुल मिलाकर, 30 लाख रुपये की लागत से मेडिकल सामग्री की उपलब्धता और 53 लाख रुपये की लागत से विकसित की जा रही 24×7 सिजेरियन एवं आपातकालीन प्रसव सुविधा मुजफ्फरपुर जिले के स्वास्थ्य ढांचे को नई मजबूती प्रदान करेगी। यह पहल न केवल चिकित्सा सेवाओं को मजबूत करेगी, बल्कि सामाजिक और आर्थिक दृष्टि से भी ग्रामीण परिवारों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगी।


95 लाख की लागत से 1000MT के वेयरहाउस का होगा निर्माण 

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जिले के मुसहरी प्रखंड अंतर्गत कन्हौली विशुनदत्त पंचायत के हरपुर बखरी गांव में कृषि उत्पादों के सुरक्षित भंडारण हेतु 1000 मीट्रिक टन क्षमता वाले आधुनिक वेयरहाउस का निर्माण 95 लाख रुपये की लागत से किया जाएगा। 


मुजफ्फरपुर से उठी बदलाव की मिसाल: गोदाम का संचालन जीविका के हाथों  में , कंपनी दे रही छोटे किसानों को नया बाजार एवं नई पहचान

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समर्पण जीविका महिला किसान प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड बिहार की एकमात्र बीज उत्पादक कंपनी जो कृषि क्षेत्र की एक ऐसी प्रेरक कहानी बन चुकी है, जिसने छोटे और सीमांत किसानों—खासकर महिला किसानों—को तकनीक, प्रशिक्षण और बाजार से जोड़कर आत्मनिर्भरता की नई राह दिखाई है। वर्ष 2013 में स्थापित इस कंपनी का उद्देश्य स्पष्ट था—किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज, खाद और कृषि आदानों को बाजार से कम कीमत पर उपलब्ध कराना, वैज्ञानिक प्रशिक्षण के जरिए उत्पादकता बढ़ाना और फसल उत्पादन के बाद बेहतर विपणन व्यवस्था सुनिश्चित करना।

आज यह संस्था केवल एक किसान उत्पादक कंपनी नहीं, बल्कि 2288 महिला शेयरधारकों की सामूहिक शक्ति का प्रतीक बन चुकी है। 


इनपुट से मार्केट तक—एकीकृत मॉडल

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 कंपनी किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले बीज, उर्वरक और कृषि यंत्र बाजार दर से कम कीमत पर उपलब्ध कराती है। साथ ही नियमित वैज्ञानिक प्रशिक्षण के माध्यम से रोग प्रबंधन, पोषण प्रबंधन और उन्नत खेती तकनीकों की जानकारी दी जाती है। इससे प्रति यूनिट खेती लागत में कमी आती है और उत्पादकता में उल्लेखनीय वृद्धि होती है।


वित्तीय वर्ष 2022-23 में कंपनी ने 15,685 किसानों को लाभान्वित किया। इसी वर्ष 378.63 लाख रुपये का टर्नओवर दर्ज हुआ, जबकि सकल लाभ 29.20 लाख रुपये रहा। 


लीची का मूल्य संवर्धन—मुजफ्फरपुर की पहचान को नई उड़ान

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मुजफ्फरपुर की लीची विश्वविख्यात है, और समर्पण ने इस पहचान को बाजार में बेहतर मूल्य दिलाने का मिशन बनाया है। कंपनी 226 अंशधारक किसानों के साथ लीची फसल पर विशेष कार्य कर रही है। फसल से पहले पोषण एवं रोग प्रबंधन पर प्रशिक्षण दिया जाता है और आवश्यक खाद-दवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं।

फसल तैयार होने के बाद पूरी प्रक्रिया अत्यंत पेशेवर तरीके से संचालित होती है। सुबह 4 बजे से लीची की तुड़ाई, ग्रेडिंग और पैकेजिंग कर उसे पंजीकृत खरीदारों की मांग के अनुसार भेजा जाता है। कंपनी के खरीदारों में Reliance Retail, BigBasket और FreshPicks जैसे बड़े नाम शामिल हैं। एयर कार्गो के माध्यम से लीची को मुंबई, बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे महानगरों में समयबद्ध तरीके से पहुंचाया जाता है।

सबसे खास बात यह है कि किसानों को उनके उत्पाद का भुगतान एक दिन के भीतर सीधे उनके बैंक खाते में कर दिया जाता है। इससे बिचौलियों की भूमिका खत्म होती है और किसानों को उचित मूल्य सुनिश्चित होता है।


पोषण वाटिका—आर्थिक के साथ पोषण सुरक्षा

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समर्पण केवल बाजार उन्मुख खेती तक सीमित नहीं है, बल्कि परिवार के पोषण पर भी बराबर ध्यान देती है। कंपनी किसान दीदियों को घर के आसपास ‘पोषण वाटिका’ लगाने के लिए प्रेरित करती है। देशी किस्म के फलदार, पत्तेदार, बींस और कंद वाली सब्जियों के बीज बाजार मूल्य से लगभग आधे दाम पर उपलब्ध कराए जाते हैं। इससे परिवार का पोषण स्तर सुधरता है और अतिरिक्त सब्जियों की बिक्री से आय का नया स्रोत भी बनता है।


गेहूं बीज उत्पादन—एमएसपी से आगे का लाभ

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मुजफ्फरपुर में गेहूं का व्यापक उत्पादन होता है, लेकिन सामान्य फसल का मूल्य अक्सर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से कम मिल पाता है। इस चुनौती का समाधान समर्पण ने बीज उत्पादन के माध्यम से निकाला है।

कंपनी ने बिहार राज्य बीज एवं ऑर्गेनिक प्रमाणन एजेंसी से उत्पादक संस्था के रूप में निबंधन कर प्रमाणित गेहूं बीज उत्पादन शुरू कराया है। इससे किसानों को उत्पादित बीज पर न्यूनतम एमएसपी के साथ अतिरिक्त बोनस भी मिलता है, जो बाजार मूल्य से लगभग 20 प्रतिशत तक अधिक होता है। यह मॉडल किसानों की आय में ठोस वृद्धि का उदाहरण बन रहा है।


बहुआयामी कृषि व्यवसाय

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समर्पण की गतिविधियां केवल लीची और गेहूं तक सीमित नहीं हैं। कंपनी सब्जी बीज, ताजी सब्जियां, आम, दलहन, आलू, धान उत्पादन एवं विपणन, कृषि यंत्र आपूर्ति और पोषण किट वितरण जैसे विविध क्षेत्रों में सक्रिय भूमिका निभा रही है। इससे किसानों को एक ही मंच पर बहुआयामी सेवाएं मिलती हैं।


महिला सशक्तिकरण का सशक्त उदाहरण

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2288 महिला शेयरधारकों की भागीदारी इस कंपनी को विशिष्ट बनाती है। यहां महिलाएं केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि निर्णय प्रक्रिया की सहभागी हैं। पारदर्शी प्रबंधन और नियमित बैठकें उन्हें कृषि व्यवसाय की समझ और नेतृत्व क्षमता प्रदान करती हैं।

करीब एक दशक से समर्पण जीविका महिला किसान प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड छोटे और सीमांत किसानों के जीवन में खुशहाली लाने का सतत प्रयास कर रही है। इनपुट से लेकर बाजार तक की मजबूत कड़ी, समयबद्ध भुगतान, वैज्ञानिक प्रशिक्षण और मूल्य संवर्धन की रणनीति ने इसे बिहार में कृषि परिवर्तन की एक इनोवेटिव मिसाल बना दिया है।

आने वाले वर्षों में यह मॉडल न केवल मुजफ्फरपुर, बल्कि पूरे बिहार के सीमांत किसानों और जीविका से जुड़े शेयरधारकों के लिए स्थायी विकास की मजबूत नींव साबित हो सकता है।

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