---प्राकृत का ही विकसित रूप बज्जिका है
मुजफ्फरपुर। थियोसोफिकल लाज के ऐतिहासिक एवं प्रणम्य सभागार में आज बज्जिका विकास मंच मुजफ्फरपुर ने चित्तरंजन सिन्हा कनक की अध्यक्षता में भगवान महावीर के जनम दिन को -" बज्जिका दिवस " के रूप में मनाया ।आगत अतिथियों का स्वागत एवं मंच संचालन करते हुए बज्जिका विकास मंच के उपाध्यक्ष साहित्य मार्तण्ड उदय नारायण सिंह ने कहा कि भगवान महावीर के समय बज्जिकांचल की भाषा प्राकृत थी जो तत्कालीन जनपदीय भाषा थी और आज की बज्जिका उसी प्राकृत भाषा का विकसित रूप है।उन्होंने सोदाहरण कहा कि अम्मा,महिला ,गुरु, भगवान और ऐसे सैकडों शब्द हैं जिन्हें आज हम बज्जिका में उसी रूप में इस्तेमाल करते हैं जैसे पहले प्राकृत में किया जाता था ।प्राकृत में भी श ,ष के बदले स का प्रयोग होता है जिसे आज हम बज्जिका भाषा में प्रयोग करते हैं ।इस तरह आजकी बज्जिका प्राकृत भाषा का ही विकसित रूप है।डॉ विनोद कुमार सिन्हा ने कहा कि हमारी बोली का नामाकरण बज्जिका भले ही 1936 में हुआ लेकिन यह भाषा निश्चित रूप से महावीर और बुद्ध के समय की जनपदीय भाषा है ।डॉ हरि किशोर प्रसाद सिंह ने कहा कि बज्जिका नामाकरण का श्रेय निश्चित रूप से पंडित राहुलसांकृत्यान को जाता है लेकिन यह भाषा ई सन से 600/700 वर्ष पहले से जन- भाषा के रूप में बोली जाती है और जिस जनभाषा को पहले प्राकृत कहा जाता था उसे ही आज हम बज्जिका कहते हैं ।अपने अध्यक्षीय संबोधन में चित्तरंजन सिन्हा कनक ने कहा कि निश्चित रूप से बज्जिका प्राकृत की बेटी है । प्राकृत का अर्थ है स्वभावतः । अर्थात बिना बंधन का । प्राकृत भाषा का कोई व्याकरण नहीं है ।इसका सीधा अर्थ है कि प्राकृत पंडितों की नहीं तत्कालीन आमजनों की भाषा थी ।ठीक उसी तरह बज्जिका भी विद्वानों की नहीं आजके आम नागरिकों की भाषा है जिसे आज ढाई से तीन करोड़ लोग बोलते हैं । लेकिन भारत में होने वाली जनगणना में बज्जिका का निर्धारित नहीं होना बज्जिकांचल की जन भावना का अनादर है ।बज्जिकांचल विकास पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष भाई देवेन्द्र राकेश ने कहा जब तक बज्जिका अष्टम सूची में शामिल नहीं होगी तब तक हम चैन से नहीं बैठेंगे।हमारा धरना - प्रदर्शन और आन्दोलन चलता रहेगा।जब तक मेरी सांस है हम बज्जिका के लिए जियेंगे और मरेंगे।
इस अवसर पर डाॅ पुष्प गुप्ता, प्रेम कुमार वर्मा,राजेश प्रसाद शाही,रमेश प्रसाद श्रीवास्तव, उमाशंकर प्रसाद चौरसिया,सुनीता सोनी एवं अनिल शंकर ठाकुर ,डॉ उषा किरण ने भी अपने सारगर्भित विचार रखें।इस बैठक में बज्जिका अनुरागी लक्ष्मी नारायण पाण्डेय,प्रमोद नारायण मिश्र ,देवेन्द्र प्रसाद शर्मा,शोभा भवानी,ब्रजनन्दन सिंह एवं गोपाल शिवम जैसे प्रभृति जनों की उपस्थिति से थियोसोफिकल लाज का ऐतिहासिक एवं प्रणम्य सभागार, सुवासित हो रहा था। अध्यक्ष की अनुमति से धन्यवाद ज्ञापन संगठन मंत्री मधुमंगल ठाकुर ने किया।तत्पश्चात अध्यक्ष की अनुमति से डाॅ अहिल्या मिश्र संस्थापक संपादक पुष्पक सिंह वाहिनी हैदराबाद की असामयिक निधन पर एक मिनट का मौन रख पुण्यात्मा की शांति हेतु ईश्वर से प्रार्थना की गई।तत्पश्चात बैठक की कार्यवाही समाप्त हुई ।





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भगवान महावीर का जन्म दिन-" बज्जिका दिवस "के रूप में मनाया जाना गौरव की बात है ।समाचार से गुजरते हुए मन आह्लादित हुआ ।सादर साधुवाद!
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