---प्रतिपदा से नवमी तक मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा का विशेष महत्व, नवार्ण मंत्र का जाप फलदायी
मुजफ्फरपुर। शारदीय नवरात्र मां दुर्गा की आराधना, साधना और आध्यात्मिक उन्नति का विशेष पर्व है। नवरात्र के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। प्रत्येक स्वरूप का अपना विशिष्ट महत्व है, जो भक्तों को जीवन में स्थिरता, संयम, साहस, ऊर्जा, ममता, शक्ति, निर्भयता, करुणा और सिद्धि का संदेश देता है। आध्यात्मिक गुरु पं. कमला पति त्रिपाठी ने नवरात्र के नौ दिनों में देवी के विभिन्न स्वरूपों की आराधना और उनके मंत्रों के जाप के महत्व पर प्रकाश डाला है।
पं. त्रिपाठी ने बताया कि नवरात्र के प्रथम दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है, जो स्थिरता और संकल्प की प्रतीक हैं। दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की आराधना तप और संयम का संदेश देती है। तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा साहस और शांति के लिए की जाती है। चौथे दिन मां कूष्मांडा की आराधना सृजन और ऊर्जा का प्रतीक मानी जाती है।
पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा ममता और संरक्षण, छठे दिन मां कात्यायनी की आराधना शक्ति और विजय, जबकि सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा भय एवं नकारात्मकता के नाश के भाव से की जाती है। आठवें दिन मां महागौरी की आराधना शुद्धता और करुणा तथा नौवें दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा सिद्धि और पूर्णता का प्रतीक मानी जाती है।
नौ दिनों के विशिष्ट मंत्र
पं. कमला पति त्रिपाठी के अनुसार, नवरात्र के प्रत्येक दिन देवी के विशेष मंत्र का जाप किया जाता है। प्रथम दिन मां शैलपुत्री के लिए 'ह्रीं शिवायै नमः', दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी के लिए 'ॐ ह्रीं श्री अम्बिकायै नमः', तीसरे दिन मां चंद्रघंटा के लिए 'ऐं श्रीं शक्तयै नमः' तथा चौथे दिन मां कूष्मांडा के लिए 'ऐं ह्रीं देव्यै नमः' मंत्र का जाप किया जाता है।
पांचवें दिन मां स्कंदमाता, छठे दिन मां कात्यायनी, सातवें दिन मां कालरात्रि, आठवें दिन मां महागौरी और नौवें दिन मां सिद्धिदात्री के मंत्रों का जाप करने की परंपरा है। उन्होंने बताया कि नवरात्र के दौरान श्रद्धा और नियमपूर्वक मंत्र जाप तथा देवी की आराधना का विशेष आध्यात्मिक महत्व है।
नवार्ण मंत्र का भी विशेष महत्व
पं. त्रिपाठी ने बताया कि मां भगवती का मूल नवार्ण मंत्र 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे॥' भी नवरात्र में जपने योग्य महत्वपूर्ण मंत्र है। भक्त नौ दिनों तक श्रद्धापूर्वक देवी की पूजा-अर्चना, मंत्र जाप और साधना कर आध्यात्मिक शांति एवं सकारात्मकता की कामना करते हैं।
उन्होंने कहा कि नवरात्र केवल धार्मिक अनुष्ठान का पर्व नहीं, बल्कि आत्मसंयम, संकल्प, साधना और सकारात्मक विचारों को जीवन में अपनाने का अवसर भी है।
पं. कमला पति त्रिपाठी श्री लक्ष्मेश्वर वैद्यनाथ महादेव मंदिर, अखाड़ा घाट, मुजफ्फरपुर, बिहार के संस्थापक हैं।




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