संत गाडगे महाराज की 150वीं जयंती पर कार्यक्रम आयोजित

 


मुजफ्फरपुर। एक प्रयास मंच के द्वारा पुरानी गुदरी, अंबेडकर नगर में सामाजिक शिक्षक व समाज सुधारक संत गाडगे महाराज की 150वीं जयंती के अवसर पर एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में स्थानीय लोगों ने भाग लेकर संत गाडगे महाराज के विचारों को याद किया और उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।

मंच के संस्थापक संजय रजक ने अपने संबोधन में कहा कि संत गाडगे महाराज का जन्म 23 फरवरी 1876 को महाराष्ट्र के अमरावती जिले के अंजनगांव सुरजी तालुका के शेडगांव गांव में हुआ था। वे एक महान सामाजिक शिक्षक और समाज सुधारक थे, जिन्होंने जीवनभर शिक्षा, स्वच्छता और समाज सेवा का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि संत गाडगे बाबा का मानना था कि शिक्षा हर व्यक्ति के लिए अत्यंत आवश्यक है। उनका प्रसिद्ध संदेश था कि यदि जरूरत पड़े तो खाने की थाली बेचकर भी शिक्षा प्राप्त करनी चाहिए।


बताया गया कि समाज में शिक्षा का प्रकाश फैलाने के लिए संत गाडगे महाराज ने 21 शिक्षण संस्थानों तथा 100 से अधिक अन्य संस्थानों की स्थापना में योगदान दिया। वे जहां भी जाते थे, वहां की गंदगी देखकर स्वयं सफाई करने लगते थे। उनके इस कार्य से प्रभावित होकर ग्रामीण लोग सहयोग देते थे और उन्हीं पैसों से गांवों में स्कूल, अस्पताल, धर्मशालाएं, गौशालाएं और छात्रावासों का निर्माण कराया जाता था।

उनके सम्मान में 1 मई 1983 को महाराष्ट्र सरकार ने नागपुर विश्वविद्यालय को विभाजित कर संत गाडगे बाबा  अमरावती यूनिवर्सिटी की स्थापना की। वहीं 20 दिसंबर 1998 को भारत सरकार ने उनके सम्मान में डाक टिकट भी जारी किया था।


कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों ने संत गाडगे महाराज के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। साथ ही लोगों के बीच पठन सामग्री का वितरण भी किया गया, ताकि सभी लोग शिक्षा प्राप्त कर अपने परिवार, समाज और देश का नाम रोशन कर सकें।

इस अवसर पर जीत रजक, सोनाली, गोलू, शुभम, जानकी, संजय रजक सहित कई अन्य लोग उपस्थित थे।

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