मुजफ्फरपुर। जिले के सकरा प्रखंड स्थित विष्णुपुर बघनगरी गांव के प्रसिद्ध परशुराम धाम बघनगरी में अखिल भारतीय भगवान परशुराम परिषद के तत्वावधान में भव्य सामूहिक उपनयन संस्कार (जनेऊ संस्कार) का आयोजन श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ संपन्न हुआ। इस धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजन में विभिन्न जिलों से आए कुल 121 बरुआ (बालक) ने भाग लिया और वैदिक रीति-रिवाजों के अनुसार उनका उपनयन संस्कार कराया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं, अभिभावकों, समाज के प्रतिनिधियों और गणमान्य लोगों की उपस्थिति रही, जिससे पूरे क्षेत्र में धार्मिक और आध्यात्मिक माहौल बना रहा।
कार्यक्रम के अध्यक्ष सह कार्यक्रम संयोजक डॉ. अनमोल मिश्रा ने बताया कि सामूहिक उपनयन संस्कार का मुख्य उद्देश्य समाज में धार्मिक परंपराओं और संस्कारों को सुदृढ़ करना है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में जब नई पीढ़ी आधुनिक जीवनशैली की ओर तेजी से अग्रसर हो रही है, ऐसे में इस प्रकार के आयोजन बच्चों और युवाओं को अपनी सांस्कृतिक जड़ों और परंपराओं से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम बनते हैं। उन्होंने सभी अभिभावकों और प्रतिभागियों को बधाई देते हुए कहा कि सामूहिक उपनयन संस्कार न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह समाज में एकता, सहयोग और सामूहिकता की भावना को भी मजबूत करता है।
परिषद के संस्थापक अवधेश मिश्रा उर्फ संत जी ने कहा कि परशुराम धाम बघनगरी में आयोजित होने वाला यह सामूहिक उपनयन संस्कार वर्षों से समाज की आस्था और विश्वास का केंद्र बना हुआ है। उन्होंने बताया कि यहां पर छन्दोगी और बाजेस्नेयी पद्धति से उपनयन संस्कार करवाया जाता है। जो भी बरुआ जिस परंपरा और शाखा को मानते हैं, उसी परंपरा के अनुसार उनका संस्कार विधि-विधान से कराया जाता है। उन्होंने कहा कि परिषद का उद्देश्य किसी एक परंपरा को बढ़ावा देना नहीं, बल्कि समाज की विविध परंपराओं और मान्यताओं का सम्मान करते हुए उन्हें संरक्षित और प्रोत्साहित करना है।
कार्यक्रम के दौरान वैदिक मंत्रोच्चार, हवन और पूजा-अर्चना के साथ पूरे विधि-विधान से उपनयन संस्कार संपन्न कराया गया। विद्वान आचार्यों और पंडितों की देखरेख में सभी बरुआ को यज्ञोपवीत धारण कराया गया और उन्हें धार्मिक जीवन की प्रारंभिक शिक्षा भी दी गई। इस दौरान अभिभावकों और परिवार के सदस्यों में विशेष उत्साह और गर्व का माहौल देखने को मिला। आयोजन स्थल को पारंपरिक ढंग से सजाया गया था और पूरे परिसर में वैदिक मंत्रों की गूंज से आध्यात्मिक वातावरण बना रहा।
उपनयन संस्कार को हिंदू धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण संस्कार माना जाता है। इस संस्कार के माध्यम से बालक को शिक्षा, अनुशासन, नैतिकता और आध्यात्मिकता के मार्ग पर अग्रसर होने की प्रेरणा दी जाती है। संस्कार के पश्चात बालक को यज्ञोपवीत धारण कराया जाता है, जो ज्ञान, जिम्मेदारी और धार्मिक जीवन का प्रतीक माना जाता है। सामूहिक रूप से इस संस्कार के आयोजन से समाज के अधिक से अधिक लोगों को इसमें भाग लेने का अवसर मिलता है और इससे सामाजिक समरसता तथा एकजुटता भी मजबूत होती है।
इस अवसर पर जिले के विद्वान पुरोहितों की उपस्थिति में उपनयन संस्कार संपन्न कराया गया। जिनमें प्रमुख रूप से प्रहलाद मिश्र, जगदीश नारायण मिश्र, सत्येंद्र शर्मा, सियाराम शर्मा और दिलीप शर्मा शामिल थे। सभी विद्वानों ने वैदिक परंपराओं के अनुरूप पूरे विधि-विधान से संस्कार संपन्न कराया और बच्चों को धार्मिक आचार-विचार की जानकारी दी।
कार्यक्रम में कई गणमान्य लोगों की उपस्थिति रही, जिनमें रविंद्र कुमार मिश्रा, रमेश चंद्र मिश्रा, बबलू मिश्रा, पारस मिश्रा, डॉक्टर रोशन मिश्रा, नीलमणि मिश्रा, विकास ठाकुर, चन्द्रशेखर प्रसाद सिंह, मुक्तेश्वर प्रसाद सिंह, कामेश्वर मिश्र घुमक्कड़, नवीन कुमार मिश्रा, सुनील मिश्रा और संजीव मिश्रा समेत कई लोग शामिल थे। सभी अतिथियों ने इस आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम समाज में सकारात्मक संदेश देते हैं और लोगों को अपनी परंपराओं और संस्कारों से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य करते हैं।
समारोह के अंत में परिषद के पदाधिकारियों ने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों, पुरोहितों और सहयोगियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी इस तरह के आयोजन नियमित रूप से किए जाएंगे ताकि समाज में संस्कार, संस्कृति और सामाजिक एकता को और अधिक मजबूत किया जा सके। लोगों की उत्साहपूर्ण भागीदारी और सहयोग से यह आयोजन सफल और सार्थक बना।










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