मुजफ्फरपुर में भूकंप आपदा मॉक ड्रिल का सफल आयोजन, त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता का परीक्षण

 


मुजफ्फरपुर। संभावित भूकंप आपदा से प्रभावी ढंग से निपटने की तैयारियों को परखने के उद्देश्य से गुरुवार को जिले में व्यापक आपदा मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया। सुबह 8:00 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक चले इस अभ्यास में विभिन्न विभागों और एजेंसियों ने समन्वित रूप से भाग लिया। इस दौरान आपदा की स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया, संसाधनों के उपयोग और विभागीय तालमेल का व्यावहारिक परीक्षण किया गया।

यह मॉक ड्रिल बिहार स्टेट डिजास्टर मैनजमेंट ऑथोरिटी  के मार्गदर्शन में आयोजित की गई, जिसकी लाइव स्ट्रीमिंग भी की गई। प्राधिकरण द्वारा केंद्रीय अर्द्धसैनिक बलों सीआईएसएफ और सीआरपीएफ के अधिकारियों को प्रेक्षक के रूप में तैनात किया गया था। इन प्रेक्षकों ने पूरे अभ्यास की निगरानी की और अपनी विस्तृत रिपोर्ट आपदा प्रबंधन विभाग को सौंपेंगे, जिससे भविष्य की रणनीतियों को और बेहतर बनाया जा सके।

अभ्यास में एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, अग्निशमन दल, होमगार्ड, स्वास्थ्य विभाग, पुलिस प्रशासन सहित अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी और कर्मी शामिल हुए। सभी ने निर्धारित आपदा प्रोटोकॉल के तहत अपने-अपने दायित्वों का निर्वहन किया। मॉक ड्रिल के संचालन के लिए सिकंदरपुर स्टेडियम में स्टेजिंग एरिया बनाया गया था, जहां प्रशिक्षित मानव बल, राहत एवं बचाव सामग्री, एंबुलेंस, अग्निशमन वाहन और अन्य आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए गए थे।

जिले के शहरी क्षेत्र में पांच प्रमुख स्थानों को सिमुलेशन साइट के रूप में चिन्हित किया गया था, जिनमें समाहरणालय परिसर, सदर अस्पताल, इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड प्लांट, राधा देवी प्लस टू उच्च विद्यालय और मजिस्ट्रेट कॉलोनी (जूरन छपरा) शामिल थे। समाहरणालय परिसर में भूकंप की काल्पनिक सूचना मिलते ही राहत एवं बचाव दल मौके पर पहुंचे और मलबे में फंसे लोगों को निकालने, आग पर नियंत्रण, प्राथमिक उपचार देने तथा घायलों को अस्पताल पहुंचाने का अभ्यास किया गया।

मॉक ड्रिल में अपर समाहर्ता (आपदा प्रबंधन) शैलेश कुमार चौधरी ने इंसिडेंट कमांडर के रूप में पूरे अभियान का नेतृत्व किया। इंसिडेंट कमांड सिस्टम के तहत अधिकारियों को स्पष्ट जिम्मेदारियां सौंपी गई थीं, जिससे आदेश और सूचना का प्रवाह सुचारु बना रहा। इसके साथ ही संचार तंत्र, वायरलेस और मोबाइल नेटवर्क, नियंत्रण कक्ष की सक्रियता तथा यातायात व्यवस्था की भी जांच की गई।

अधिकारियों ने बताया कि इस तरह की मॉक ड्रिल से प्रशासन की तत्परता का आकलन होता है, संभावित कमियों की पहचान होती है और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय मजबूत होता है। साथ ही आम लोगों में भी आपदा के प्रति जागरूकता बढ़ती है। इस अभ्यास से यह संदेश गया कि जिला प्रशासन भूकंप जैसी आपदाओं से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार और सजग है।

Post a Comment

0 Comments