मुजफ्फरपुर। जिला हिंदी साहित्य सम्मेलन, मुजफ्फरपुर की ओर से थियोसोफिकल लॉज, नया टोला में ‘हिंदी हमारी पहचान’ विषय पर संगोष्ठी आयोजित की गई। अध्यक्षता सम्मेलन अध्यक्ष चित्तरंजन सिन्हा ‘कनक’ ने की।
अतिथियों का स्वागत करते हुए सम्मेलन के प्रधानमंत्री साहित्य मार्तंड उदय नारायण सिंह ने कहा कि हिंदी हमारी संस्कार, संस्कृति, स्नेह और संवाद की भाषा है। हम जिस सहजता से हिंदी में अपने भावों को व्यक्त करते हैं, उतनी सुगमता से किसी अन्य भाषा में नहीं कर पाते।
सम्मेलन के कार्याध्यक्ष डॉ. शारदाचरण ने कहा कि हिंदुस्तान की भाषा हिंदी है, क्योंकि यह आम-अवाम और सर्वहारा की भाषा है। डॉ. विनोद कुमार सिन्हा ने हिंदी को सरल, सुबोध, समुन्नत और श्रीसंपन्न भाषा बताया।
अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में चित्तरंजन सिन्हा ‘कनक’ ने कहा कि हिंदी भारत की धड़कन, आत्मा और दिल है। साहित्य मंत्री डॉ. प्रियंवदा दास ने कहा कि भारत को जोड़ने वाली भाषा हिंदी है और इसका फलक काफी व्यापक है।
संगोष्ठी में प्रेम कुमार वर्मा, डॉ. हरिकिशोर प्रसाद सिंह, रमेश प्रसाद श्रीवास्तव, डॉ. उषा किरण, डॉ. बी.के. मल्लिक, डॉ. अजीत कुमार गौड़, उमाशंकर चौरसिया, उमानाथ सिंह, दिलीप कुमार, सतीश कुमार और अरुण कुमार ने भी अपने विचार रखे।
पुस्तक ‘अंजुरी में पंखुड़ी’ का लोकार्पण
कार्यक्रम के दूसरे सत्र में डॉ. उषा किरण की पुस्तक ‘अंजुरी में पंखुड़ी’ का लोकार्पण किया गया। इसके बाद कवियों ने अपनी रचनाओं का पाठ किया। कविताओं की प्रस्तुति से कार्यक्रम स्थल पर साहित्यिक वातावरण बन गया और श्रोताओं ने करतल ध्वनि से कवियों का उत्साहवर्धन किया।
कार्यक्रम का समापन सम्मेलन के सहायक वित्तमंत्री मधुमंगल ठाकुर के धन्यवाद ज्ञापन के बाद अध्यक्षीय आदेश से हुआ।





1 Comments
वाह! क्या खूब 🌹🌹
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