महामानव श्यामा प्रसाद मुखर्जी जयंती समारोह

 



---दो निशान,दो विधान, दो प्रधान के आजीवन प्रबल विरोधी रहे श्यामाप्रसाद मुखर्जी


---धारा 370 हटा भाजपा ने दी श्यामाप्रसाद मुखर्जी को सच्ची श्रद्धांजली


मुजफ्फरपुर। भाजपा कार्यालय मे पूर्वी जिलाध्यक्ष विवेक कुमार के अध्यक्षता मे जयंती दिवस का आयोजन किया गया,जिसमे उनके तैलचित्र पर माल्यार्पण और पुष्पांजली कर कार्यक्रम की शुरुआत की गयी।

जिसमे उनके व्यक्तित्व और कृतित्व पर विस्तार से प्रकाश डाला गया।

वक्ताओ ने उनके जीवन पर बोलते हुये कहा की 06 जुलाई 1901 को जन्मे डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी भारतीय राजनीति, शिक्षा और राष्ट्रवाद के इतिहास में एक अमिट अध्याय हैं।आज उनकी 126वीं जयंती है।

जनसंघ के संस्थापक और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नेता रहे श्यामा प्रसाद मुखर्जी देश के पहले उद्योग और आपूर्ति मंत्री रहे। उन्होंने जवाहरलाल नेहरू के मंत्रिमंडल में स्वतंत्र भारत के शुरुआती तीन साल तक मंत्री के रूप में अपनी भूमिका निभाई। कई अहम काम किए, जो बाद में भारत के औद्योगिक विकास में मील का पत्थर भी साबित हुए।मुखर्जी का दृष्टिकोण भारत को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना था। उन्होंने भारत को आयात पर निर्भरता कम करने और स्वदेशी उत्पादन को बढ़ाने की नीति अपनाई। उन्होंने पहले उद्योग मंत्री के रूप में जो आर्थिक, औद्योगिक और राष्ट्रीय नीतियां बनाईं, वो आज भी प्रासंगिक हैं।मुखर्जी ने भारतीय उद्योगों को आत्मनिर्भर बनाने और आधुनिक तकनीकों को अपनाने पर बल दिया।हिंदुस्तान स्टील लिमिटेड जैसी बड़ी औद्योगिक परियोजनाओं की नींव रखी, जो बाद में भारत के औद्योगिक विकास में मील का पत्थर साबित हुई।उन्होंने 1948 में भारत की पहली औद्योगिक नीति तैयार की।यह नीति सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों के संतुलित विकास पर केंद्रित थी।उनकी पहल पर ही सिंदरी फर्टिलाइजर प्लांट और कई सार्वजनिक उपक्रमों की नींव रखी गई, जो आगे चलकर भारत के औद्योगिक विकास की रीढ़ बनी।


श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जन्म कोलकाता के एक प्रतिष्ठित और शिक्षित परिवार में हुआ।उनके पिता सर आशुतोष मुखर्जी बंगाल के प्रसिद्ध शिक्षाविद, न्यायविद और कलकत्ता विश्वविद्यालय के उपकुलपति रहे। श्यामाप्रसाद मुखर्जी के नाम सबसे कम उम्र के युवा उपकुलपति का रिकार्ड आज भी है।


मुखर्जी ने नेहरू मंत्रिमंडल में रहते हुए कश्मीर, धर्म, और राष्ट्रवाद से जुड़े मुद्दों पर अपनी स्पष्ट और साहसिक राय दी। हालांकि, उनके और नेहरू के बीच वैचारिक मतभेद थे, विशेषकर कश्मीर के विशेष दर्जे (अनुच्छेद 370) के विषय में। मुखर्जी ने कश्मीर मुद्दे और नेहरू की नीतियों से असहमति के कारण 1950 में मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया।उनका मानना था कि अनुच्छेद 370 भारत की एकता और अखंडता के लिए खतरा है।आज माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उनके सपने को साकार कर सच्ची श्राद्धांजली दी है।


उपस्थित लोगो मे पूर्व मंत्री सुरेश कुमार शर्मा,प्रदेश महामंत्री डाॅ राजेश वर्मा,शिवेश राम प्रदेश उपाध्यक्ष बेबी कुमारी प्रदेश सह मिडीया प्रभारी प्रभात मालाकार जिला महामंत्री मुकेश शर्मा,मनोज तिवारी, रविशंकर कुशवाहा उपाध्यक्ष सुरेश कुमार राष्ट्रीय कार्यसमिती महिला डाॅ ममता रानी,मंत्री पूनम वर्मा,रीतू आनंद सहनी,पारितोष सिंह, नंदकिशोर पासवान, लालबाबू सहनी,कृष्णा महतो जिला सह कोषाध्यक्ष डाॅ साकेत शुभम ठाकुर प्रवक्ता रवि गुप्ता,मसदुल हसन गुड्डु मिडीया प्रभारी रंजन ओझा,विधानसभा प्रभारी सतीश कुमार,मंडल अध्यक्ष नंदकिशोर ठाकुर, मंडल प्रभारी आनंद सिंह,शैलेन्द्र कुमार ,सिद्धार्थ चौधरी,रामेश्वर पासवान, डाॅ मोनालिसा,सविता जायसवाल, अशोक शर्मा,आनंद राठौर, अजीत द्विवेदी,रूपेश भारतीय, दिवाकर शर्मा,अरविंद झा,श्लोक श्रीवास्तव, मनीष चौधरी,राजेश कुमार सिंह, डाॅ देवेन्द्र कुमार देव लोग मौजूद रहे।

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