मुजफ्फरपुर। संयुक्त श्रम भवन, गन्नीपुर स्थित उप श्रम आयुक्त कार्यालय, तिरहुत प्रमंडल मुजफ्फरपुर के सभागार में बाल एवं किशोर श्रम उन्मूलन एवं पुनर्वास हेतु राज्य रणनीति एवं कार्य योजना 2025 के अंतर्गत एक दिवसीय कार्यशाला/सेमिनार का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का उद्घाटन उप श्रम आयुक्त तिरहुत प्रमंडल नीरज नयन, सहायक श्रमायुक्त मुजफ्फरपुर राकेश रंजन, सहायक श्रमायुक्त बेतिया सुबोध कुमार, श्रम अधीक्षक मुजफ्फरपुर अजय कुमार, श्रम अधीक्षक वैशाली शशि कुमार सक्सेना, श्रम अधीक्षक सीतामढ़ी प्रभारी पूर्वी चंपारण (मोतिहारी) रमाकांत कुमार, श्रम अधीक्षक शिवहर/प्रभारी पश्चिम चंपारण (बेतिया) विजय कुमार ठाकुर, जिला बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष उदय शंकर शर्मा, एनजीओ कानूनी सलाहकार अमोद कुमार, अनिल कुमार तथा रेल थाना अध्यक्ष रंजीत कुमार ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया।
कार्यशाला में मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, वैशाली, शिवहर, पूर्वी चंपारण (मोतिहारी) और पश्चिम चंपारण (बेतिया) जिलों में पदस्थापित सभी प्रखंडों के श्रम प्रवर्तन पदाधिकारियों ने भाग लिया।
कार्यक्रम के संयोजक उप श्रम आयुक्त नीरज नयन ने बताया कि बाल एवं किशोर श्रम उन्मूलन के लिए राज्य कार्य योजना 2025 लागू की गई है, जिसमें इस विषय से जुड़े कार्यों के लिए 18 विभागों को अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। इस दौरान राज्य कार्य योजना के प्रावधानों तथा बाल एवं किशोर श्रम से संबंधित विभिन्न कानूनों की विस्तृत जानकारी दी गई।
उन्होंने बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम 1986 एवं संशोधित 2016 के प्रावधानों की जानकारी देते हुए कहा कि बच्चों का स्थान स्कूल और खेल के मैदान में है, न कि होटल, ढाबा, मोटर गैरेज या फैक्ट्री में। शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत 14 वर्ष तक के बच्चों को अनिवार्य शिक्षा का अधिकार प्राप्त है और यह हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है कि हर बच्चे को शिक्षा मिले और उसका बचपन सुरक्षित रहे।
कार्यक्रम का मंच संचालन श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी डॉ. रश्मि राज (मुरौल) ने किया। तकनीकी सत्र में विभिन्न श्रम प्रवर्तन पदाधिकारियों ने बाल श्रमिकों की विमुक्ति, पुनर्वास, राज्य कार्य योजना तथा आर्थिक एवं गैर-आर्थिक पुनर्वास से जुड़े प्रावधानों की जानकारी दी।
बताया गया कि बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम 1986 की धारा 3 के तहत 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों से काम कराना प्रतिबंधित है। ऐसा करने पर धारा 14(1) के तहत 20 हजार से 50 हजार रुपये तक जुर्माना या 6 माह से 2 वर्ष तक की सजा अथवा दोनों का प्रावधान है।
जिला बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष ने बताया कि बाल कल्याण समिति किशोर न्याय (देखभाल और संरक्षण) अधिनियम 2015 के तहत गठित जिला स्तरीय वैधानिक संस्था है, जिसका उद्देश्य अनाथ, परित्यक्त एवं दुर्व्यवहार के शिकार बच्चों के कल्याण, सुरक्षा और पुनर्वास को सुनिश्चित करना है। समिति जरूरतमंद बच्चों के मामलों की जांच कर उन्हें बाल देखभाल संस्थानों, फोस्टर केयर या गोद लेने की प्रक्रिया के माध्यम से पुनर्वासित करती है तथा बाल देखभाल संस्थानों की नियमित निगरानी भी करती है।
श्रम अधीक्षक मुजफ्फरपुर अजय कुमार ने बाल श्रम उन्मूलन के लिए सभी हितधारकों से प्रभावी कदम उठाने का आह्वान किया। साथ ही राज्य कार्य योजना 2025 के तहत बाल श्रमिकों की विमुक्ति के लिए धावा दल के माध्यम से सघन अभियान चलाए जाने की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि विमुक्त किए गए प्रत्येक बाल श्रमिक को एक माह का राशन एवं वस्त्र के लिए 3,000 रुपये तथा मुख्यमंत्री राहत कोष से 25,000 रुपये की सहायता प्रदान की जाती है।
कार्यक्रम के अंत में उप श्रम आयुक्त ने सभी उपस्थित हितधारकों को किसी भी परिस्थिति में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से बाल मजदूरी न कराने की शपथ दिलाई।
अंत में श्रम अधीक्षक मुजफ्फरपुर द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यशाला का समापन किया गया।
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