मुजफ्फरपुर। सामाजिक संगठन “प्रयत्न” के द्वारा आयुर्वेद और समग्र स्वास्थ्य एवं कल्याण को बढ़ावा देने में इसकी भूमिका विषय पर राष्ट्रीय वेबिनार का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में देशभर से जुड़े प्रतिभागियों ने भाग लिया।
वेबिनार की मुख्य वक्ता डॉ. रंजना यादव, असिस्टेंट प्रोफेसर, दर्शनशास्त्र, मगध महिला कॉलेज, पटना (पटना यूनिवर्सिटी) रहीं, जबकि अध्यक्षता डॉ. ज़ैरु नीशा, असिस्टेंट प्रोफेसर, दर्शनशास्त्र, रामानुजन कॉलेज, दिल्ली यूनिवर्सिटी ने की।
प्रयत्न के संस्थापक प्रभात कुमार ने मुख्य अतिथि, अध्यक्ष एवं प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए उन्हें स्मृति चिन्ह भेंट किया। मुख्य वक्ता डॉ. रंजना यादव ने अपने संबोधन में कहा कि आयुर्वेद का प्रकृति से गहरा संबंध है और इसमें दर्शन की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने आयुर्वेद के चार आयाम—हितम आयु, अहितम आयु, सुखम आयु और दुखम आयु—पर विस्तार से प्रकाश डाला।
अध्यक्षीय संबोधन में डॉ. ज़ैरु नीशा ने कहा कि मानव शरीर ब्रह्मांड का हिस्सा है और आयुर्वेद शरीर व ब्रह्मांड के बीच संबंध स्थापित करने वाला विज्ञान है। उन्होंने बताया कि आयुर्वेद का उद्गम अथर्ववेद से हुआ है, इसलिए इसे दर्शन से अलग नहीं किया जा सकता।
कार्यक्रम के अंत में सहायक कार्यक्रम प्रबंधक अमित चंद चौधरी ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।
इस अवसर पर शालिनी रंजन, अनामिका कुमारी, अर्जुन गुप्ता, जय झा, राहुल कौटिल्य, प्रज्ञा कुमारी, कुमारी हेना, सतीश सिंह, स्नेहा कुमारी, गौरव कुमार, अनिवेश आनंद, अल्ताफ राजा, मुकुल कुमार सिंह, एम.डी. फजल, विक्रम जय नारायण निषाद, खुशबू कुमारी, संजय कुमार, वीरेंद्र कुमार, राधे लखन प्रसाद, खुशी कुमारी, अशोक यादव एवं शिवानी कुमारी समेत कई सदस्यों की भूमिका सराहनीय रही।




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