आरबीबीएम कॉलेज के प्रधान लिपिक संजय कुमार पाण्डेय के मामले का खंडन उनके अधिवक्ता के द्वारा किया गया

 


---संजय कुमार पाण्डेय की ओर से मानवाधिकार अधिवक्ता एस.के.झा कर रहे हैं कोर्ट में मामले की पैरवी


मुजफ्फरपुर। बीते दिन मध्यरात्रि में आरबीबीएम कॉलेज के प्रधान लिपिक संजय कुमार पाण्डेय के घर पर पुलिस पहुँची और उन्हें हिरासत में ले लिया। इसका वीडियो मोहल्ले के किसी के मकान में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गया, जो सोशल मिडिया पर वायरल होने लगा, लेकिन पुरे मामले का खंडन सोशल मिडिया के द्वारा नहीं किया गया। संजय कुमार पाण्डेय के अधिवक्ता एस.के.झा ने बताया कि दो वर्ष पूर्व संजय कुमार पाण्डेय को उसी मोहल्ले के निवासी एक व्यक्ति से झगड़ा हो गया था, जिसमें संजय कुमार पांडेय को गंभीरता पूर्वक मारा व पीटा गया था। अहियापुर थाने की पुलिस ने घटनास्थल पर पहुंच कर संजय कुमार पांडेय को एसकेएमसीएच में भर्ती कराया, जहाँ पर उनका ईलाज हुआ और उनके आवेदन के आलोक में आरोपित की गिरफ्तारी हुई और आरोपित व्यक्ति को जेल भेजा गया। उक्त आरोपित व्यक्ति जब जेल से बाहर निकला तो लगभग 15 दिनों के बाद उसने भी संजय कुमार पांडेय के ऊपर कोर्ट में मुकदमा दर्ज कराया। उसके बाद संजय कुमार पांडेय ने उक्त मुकदमा के आलोक में अपर न्यायालय में अर्जी दाखिल की, जिसकी सुनवाई चल रही है। इसी बीच मजिस्ट्रेट कोर्ट से संजय कुमार पांडेय के विरुद्ध वारंट जारी किया गया। इसी मामले में संजय कुमार पांडेय को पुलिस के द्वारा कोर्ट में लाया गया। कोर्ट में संजय कुमार पांडेय के अधिवक्ता एस.के.झा ने सारी बातों को स्पष्ट किया। कोर्ट ने सारी बातों को सुनने के बाद संजय कुमार पांडेय को अविलम्ब जमानत पर मुक्त कर दिया। संजय कुमार पांडेय के अधिवक्ता एस.के.झा ने बताया कि संजय कुमार पांडेय की छवि को धूमिल करने के लिए किसी के द्वारा वीडियो वायरल किया गया और मामले का खंडन नहीं किया गया। मानवाधिकार अधिवक्ता एस.के.झा ने बताया कि अगर संजय पाण्डेय दोषी हैं, तो पुलिस को आधी रात के वक्त उनके घर पर जाने के बजाय उनके कॉलेज कार्यालय से ही उन्हें हिरासत में ले लेना चाहिए था लेकिन पुलिस के द्वारा ऐसा नहीं किया जाना मानवाधिकार मानक के विरुद्ध है कारण कि संजय कुमार पांडेय एक सरकारी कर्मी है, जो अपने कार्यालय अवधि में अपने कार्यालय में ही रहकर कार्य करते हैं। मानवाधिकार आयोग के जो दिशा निर्देश हैं, उसका अनुपालन हर हाल में सुनिश्चित होना चाहिए। साथ-ही-साथ माननीय सर्वोच्च न्यायालय के द्वारा विभिन्न निर्णयों में मानवाधिकार संबंधी जो मानक दिए गए हैं उसका अनुपालन हर हाल में तय होना चाहिए।

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